बचपन को बचपने में ही गवां दिया ,

बचपन को बचपने में ही गवां दिया ,

अब पीछे मुड़ के देखते हैं तो लगता है मानो तब बचपन को हमने भुलाया और अब बचपन ने हमें भुला दिया !

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!

खुश हो जाते थे खेल के मिटटी की खिलोनो से ,

जब उम्र बड़ी तो सब हकीकत में पाया पर भी वो बचपन वाली ख़ुशी न मिली !

जवान होने की दौड़ में जाने वो बचपन कहाँ गवां दिया !!

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!!

छुप जाते थे माँ बाप के आँचल में झट से ,

जब बड़े हुए तो एहसास हुआ जाने वो आँचल कहाँ गवां दिया !

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!

जिन्दगी में बढ़ते रहने की होड़ में बचपन को ऐसे लुटा दिया ,

मानो जैसे समंदर में गिर के बारिस की बूंदों ने अपना अस्तित्व ही गवां दिया !

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!

खो दिया कहीं उन बचपन के लम्हो को ,

जिन्होंने एक पल में हंसाया तो दूजे पल में रुला दिया !

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!

वो बचपन वाली तरंग नहीं रही जिन्दगी में अब तो ,

जानो उन नटखट लम्हों को कहाँ लुटा दिया !

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!

अब तो बस यादें ही रह गयी हैं बचपन की ,

लगता है जैसे वक़्त के झोंको ने मिटटी पर लिखा बचपन मिटा दिया !

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!

कोशिश बहुत करते हैं उन बचपन के लम्हों को फिर से जीने की ,

पर तब बचपन को हमने भुलाया और अब बचपन ने हमें भुला दिया !

बचपन को बचपने में ही गवां दिया !!!

Written by :kriskant

Published by kriskant

actor,who loves to make ppl laugh

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