पहले ही डब्ल्यूएचओ को बता दिया होता तो हालात इतने बेकाबू नहीं होते। काश चीन ने छिपाया नहीं होता तो मुमिकन था कि दुनिया भर में एकदम से भय और तबाही मचाने को तैयार नया कोरोना वायरस इतना पैर नहीं पसार पाता और दुनिया सतर्क हो जाती। लेकिन ऐसा नहीं हो सका और पिछले कई मौकों की तरह इस बार भी पहले की ही तरह चीन से ही निकला यह वायरस फिर दुनियाभर में आतंक का नया पर्याय बन ही गया।यह भी सच है कि संक्रमण की 60 फीसदी बीमारियां जानवरों से फैलती हैं। उससे भी बड़ा सच यह कि सैकड़ों तरह का मांस खाने के मामले में चीन दुनिया में सबसे आगे निकलता जा रहा है जिसका नतीजा दिख रहा है। ऐसे में संक्रमण और वायरस अटैक स्वाभाविक है। लेकिन इतनी बड़ी घटना को पचाने की कोशिश से चीन की नीयत पर पूरी दुनिया को शक होने लगा है।

कोरोना वायरस आज भारत समेत दुनियाभर में सेहत और जिंदगी के लिए जबरदस्त चुनौती बनकर सामने खड़ा है। पूरी दुनिया में असर भी दिखने लगा है।लेकिन दुख इस बात का है कि चीन जैसे विकसित और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश ने इस सच्चाई को सबसे क्यों छुपाया..? क्या यह मानवता को शर्मसार करने जैसा नहीं है..? जवाब शायद चीन भी न दे पाए कि वहां हजारों लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमण के सच को डेढ़ महीने छुपाकर उसे क्या मिला..?